Saturday, July 19, 2008

सवालों की उलझन...


हर_इक आरज़ू को खता मानते हैं,
तुम्हारी कमी को सज़ा मानते हैं

किसी गाम ठोकर लगेगी उन्हे भी,
जो इन पत्थरों को खुदा मानते हैं

कभी उन अंधेरों से जाकर तो पूछो,
उजालों को क्यूं बेवफ़ा मानते हैं

न‌ए दौर के हैं ये अहल-ए-मुहब्बत,
जो चेहरे बदलना अदा मानते हैं

चलो गांव में ही ठहाके लगा‌एं,
यहां मुस्कुराना बुरा मानते हैं

वही बेखुदी है वही बेकरारी,
वही एक चेहरा दवा मानते हैं

मेरी कब्र पे दर्ज़ करना ये "रंजन",
"ज़माने से खुद को जुदा मानते हैं"

15 comments:

रंजू भाटिया said...

न‌ए दौर के हैं ये अहल-ए-मुहब्बत,
जो चेहरे बदलना अदा मानते हैं

बहुत सही ..सुंदर

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत बढिया!

चलो गांव में ही ठहाके लगा‌एं,
यहां मुस्कुराना बुरा मानते हैं

pallavi trivedi said...

न‌ए दौर के हैं ये अहल-ए-मुहब्बत,
जो चेहरे बदलना अदा मानते हैं

चलो गांव में ही ठहाके लगा‌एं,
यहां मुस्कुराना बुरा मानते हैं
bahut badhiya...

समयचक्र said...

वही बेखुदी है वही बेकरारी,
वही एक चेहरा दवा मानते हैं.
सुंदर.

श्रद्धा जैन said...

कभी उन अंधेरों से जाकर तो पूछो,
उजालों को क्यूं बेवफ़ा मानते हैं

ye meri pasndida sher raha hai pahile se hi

Udan Tashtari said...

बहुत बढिया! बधाई.

डॉ .अनुराग said...

चलो गांव में ही ठहाके लगा‌एं,
यहां मुस्कुराना बुरा मानते हैं

वही बेखुदी है वही बेकरारी,
वही एक चेहरा दवा मानते हैं

सुभान अल्लाह.....अमित ....

महामंत्री - तस्लीम said...

"कभी उन अंधेरों से जाकर तो पूछो,
उजालों को क्यूं बेवफ़ा मानते हैं।"

गजल के यूं तो सभी शेर उम्दा हैं, पर यह शेर तो लाजवाब है।

Atul Pangasa said...

Har ek sher laajawaab hai.......WaH..
Aur is sher ne to maaniye sachaii aur dard zubaaN pe raKH diya ho jaise :

किसी गाम ठोकर लगेगी उन्हे भी,
जो इन पत्थरों को खुदा मानते हैं

केतन said...

वही बेखुदी है वही बेकरारी,
वही एक चेहरा दवा मानते हैं ...

bahar-e-ranjan ... subhan allah ... waah sahab waah ...
poori gHazal qatl hai bas... intzar rahega agli ka

Utpal said...

मेरी कब्र पे दर्ज़ करना ये "रंजन",
"ज़माने से खुद को जुदा मानते हैं"

ranjan sa'ab .. kya baat hai ... mujhe apna likha ek sher yaad aa gaya ....

meri turbat ko aana magar khaali haath
ho sake to laana bas apnain jajbaat

Anonymous said...

किसी गाम ठोकर लगेगी उन्हे भी,
जो इन पत्थरों को खुदा मानते हैं
...behtareen

seema said...

हर_इक आरज़ू को खता मानते हैं,
तुम्हारी कमी को सज़ा मानते हैं
-bahut hi khubsurat lagi ..aapki sawaalo ki ulzaan...
your words will mirror life.
have no worries on that score-
for truth and beauty-
are embedded sir ,in life'.u hav slipped into the covers & are bedded with his wife...

सतपाल ख़याल said...

किसी गाम ठोकर लगेगी उन्हे भी,
जो इन पत्थरों को खुदा मानते हैं
bahut dinoN ke baad vaapis aaye ho..welcome back

shahnawaz khan said...

bahut khoob